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अमर कथा सुनाते वक्त कोई भी जीव ना रहे इसलिए भगवान शिव पांचो तत्व त्याग कर गुफा पर पहुंचे

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आज बाबा अमरनाथ दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना हो गया है हर साल की तरह इस साल बड़ी तादात में लोग बाबा बर्फानी के दर्शन करते है एक बात  गौर करने वाली है बाबा अमरनाथ का शिवलिंग ज्योतिर्लिंग में शामिल नहीं है फिर भी इस के दर्शन करने के लिए बहुत अधिक संख्या में लोग आते हैं आपको यात्रा के  दोरान स्वर्ग का आनंद भी मिलेगा अमरनाथ कश्मीर में बसा हुआ है आप यहां पर आपको कुदरती नजारे  देखने को बहुत मिलेंगे उसे देखकर आप मोहित हो जाएंगे और आपके मन  से डर हट जाएगा और आप हर साल यहां पर जरूर आएंगे आइए बाबा अमरनाथ की कुछ रोचक कहानियां जानते हैं

अमर होने की कथा-:
एक बार मां पार्वती भगवान शंकर से कहती है कि मुझे अमर होने की कथा सुननी है पर भगवान शंकर उन्हें टालने का प्रयास किया करते  परंतु पार्वती जी नहीं मानी उन्होंने आखिर जिद्दी कर ली कि मुझे अमर कथा सुननी है अब परेशानि यह थी की अमर कथा सुनाते वक्त कोई भी जीव ना रहे इसलिए भगवान शिव पांचो तत्व थ्वी,जल,वायु,आकाश और अग्नि का त्याग कर गुफा पर पहुंचे और फिर अमरनाथ गुफा में पार्वती माता को अमर कथा सुनाने लगे गुफा तक पहुंचने से पहले पहलगाम पहुंचे उन्होंने अपने नंदी बैल का त्याग किया फिर चंदनवाड़ी में उनके चंद्रमा को मुक्त कर दिया फिर शेषनाग पर पहुंच कर उन्होंने अपने नाग को छोड़ दिया उसके बाद अपने प्रिय पुत्र गणेश को भी उन्होंने वहां पर छोड़  देने का निश्चय किया आखिर मे गुफा में प्रवेश किया.

जब उन्होंने पार्वती माता को अमर कथा सुनाने लगे तो वहां पर एक तोते का बच्चा था और वो इस कथा को सुनने लग गया और पार्वती माता को कथा सुनते समय नींद आ गई और उनकी जगह वहा पर बैठे तोते ने कथा सुन ली जब यह बात भगवान शिव को पता पड़ी तो तोते को मारने के लिए दौड़े पड़े जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागता रहा।भागते-भागते वह व्यासजी के आश्रम में आया और सूक्ष्म रूप बनाकर उनकी पत्नी वटिका के मुख में घुस गया.वह उनके गर्भ रह गया.

ऐसा कहा जाता है कि 12 वर्षों तक गर्भ के बाहर नहीं निकले जब भगवान श्रीकृष्ण भगवान आश्वासन दीया की बाहर निकलने पर तुम्हारे ऊपर माया का प्रभाव नहीं पड़ेगा तभी वह गर्भ से बाहर निकले और व्यास के पुत्र कहलाए यह गुफा में आपको कबूतर के भी दर्शन होगे जो भगवान शिव और माता पार्वती के रूप है और यह कबूतर आज भी वहां भक्तों को दर्शन देने के लिए विराजित है.

गुफा के दर्शन दो रास्ते-:
गुफा में दर्शन करने के लिए दो रास्ते बनाए गए हैं पहला मार्ग बालटाल का है जो संगम से होकर सीधे बाबा की गुफा तक जाता है और दूसरा मार्ग पहलगांव है इस मार्ग में आपको प्राकृतिक नजारों का बहुत आनंद मिलेगा चंदनवाड़ी,गणेश टॉप,शेषनाग और पंचतंत्र का आपको आनंद मिल जाएगा यह रास्ता भी इन सब मार्गो से होकर बाबा की गुफा तक पहुंचता है इससे आपको बहुत आनंद पहुंचेगा.

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