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5 रुपए की चिप्स का पैकेट बेचकर बनाया 850 सौ करोड़ का बिजनेस

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कहते हैं सफलता उन्हीं व्यक्तियों के कदम चूमती है जो मेहनत करते हैं और उन्हीं व्यक्तियों को एक पहचान मिलती है बिना मेहनत किए आपको फल नहीं मिल सकता जब तक आप मेहनत नहीं करेंगे तब तक आपको लाभ नहीं होगा और ना ही आप अपनी पहचान बना पाएंगे अपने बुलंद हौसले और संकल्प के साथ देश में आज नमकीन के व्यवसाय से यह कम्पनी 850 सौ करोड़ का कारोबार कर रही है यह कंपनी जो विदेशियों के बड़े-बड़े ब्रांड को भी टक्कर दे रही है प्रताप नमकीन आज के समय में सालाना 850 सौ करोड़ रुपए का टर्नओवर कर रही है जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी देगा वर्ष 2003 में अमित कुमार और अपूर्व कुमार ने अपने दोस्त अरविंद मेहता तीनो ने मिलकर एक कंपनी की शुरुआत की थी.

अपने बुलंद सपने को साकार करने के लिए छोटी सी जगह से प्रारंभ किए गए काम मैं आज उन्हें इस बुलंदियों तक पहुंचा दिया है विश्व देशभर में आज उनके चार कारखाने हैं 168 स्टोर हाउस है और 2900 वितरकों का एक नेटवर्क है अमित ने 10 वर्ष तक कंपनी में काम किया जिसके बाद वर्ष 2002 में उन्होंने इस कारोबार में खुद का बिजनेस प्रारंभ करने का फैसला लिया लेकिन 1 वर्ष में ही एक करोड रुपए का उन पर कर्ज  हो गया लेकिन उन्होंने अपने रिश्तेदारों दोस्तों से पैसे उधार लेकर कर्ज चुका दिया व्यापार में शुरुआती दिनों में ही उन्हें असफलता मिलने से उनके दिल को काफी ठेस पहुंची थी 

amit-kumat-prataap-snacksलेकिन अमित का सपना वह इतनी जल्दी से केसे भूलने वाले थे वर्ष 2002 में उन्होंने अपने भाई और एक मित्र के साथ मिलकर नमकीन व्यवसाय में जाने का निश्चय किया परिजनों से 15 लाख रुपए लेकर उन्होंने प्रताप स्नैक्स की नीव इंदौर में रखी और अपने सपने की ओर पहला कदम भी रखा उन्हें इस बात का कोई भय नहीं था कि जिस तरह पहले किए गए व्यवसाय से उन्हें जिस तरह कई लोगों की आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था और कंपनी पर कितना कर्ज हो गया था इस बात का भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा और अपने व्यवसाय को नित प्रतिदिन आगे बढ़ाते चले गए

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शुरुआत के दिनों में उन्होंने अपना पूरा ध्यान नेटवर्क पर केंद्रित किया क्योंकि उस समय उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे और ना ही उनके पास उपकरण इतने थे पहले ही वर्ष कंपनी ने 22 लाख रूपय का कारोबार किया और दूसरे वर्ष यह बढ़कर 1 करोड़ रुपए तक पहुंच गया और उनकी खुशी का ठिकाना उस समय नहीं रहा जब तीसरे ही साल में उनके 1 साल का टर्नओवर 7 करोड़ के पार पहुंच गया 

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बाजार में हो रही प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक ही क्षेत्र में अपना पैर मजबूत किया कंपनी ने 2011 में एक येलो डायमंड नाम से अपना खुद का ब्रांड सबके सामने पेश किया और जिसके बाद डेढ़ सौ करोड़ के पास उन्होंने अपना टर्न ओवर पहुंचा दिया. छोटे से व्यापार से बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों को टक्कर देने के जुनून और उनका होसला आज के समय में शहर के युवाओं को सोचने पर मजबूर करता है आज येलो डायमंड बड़ी-बड़ी नामी मल्टीनेशनल कंपनियों को काटे की टक्कर दे रही है

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