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बिजनेस का ये स्टार्टअप आपको कुछ ही वर्षों में करोड़पति बना सकते हैं

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टाटा बिरला अंबानी को 18 संपत्ति का प्रतीक माना जाता है इन्हें इतनी संपत्ति हासिल करने के लिए एक या दो दिन नहीं लगे बल्कि इन्हें कई दशक लग चुके हैं कई दशकों में इन्होंने अथाह संपत्ति अर्जित की है अपने लक्ष्य को पाने के लिए 9 दिन रात एक कर दी और निष्ठा साहस और मेहनत से उन्होंने आज दुनिया में अपना सिक्का चलाया है लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं

कुछ उधमी महज कुछ वर्षों में ही स्टार्ट अप के जरिए करोड़ों की संपत्ति भी अर्जित कर लेते हैं करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने में व्यक्ति पहले अपने बिजनेस या कंपनी के मुनाफे से करोड़ों की संपत्ति अर्जित करते हैं आज के समय में स्टार्टअप चलाने वाले कुछ युवा उधमी बहुत कम समय में ही करोड़ों रुपए के मालिक बन गए हैं

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आज हम आपको उन व्यक्तियों कब वह सीक्रेट बताएंगे जिससे कि वह कुछ समय में करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन गए वह करोड़ों रुपए आज भी कमा रहे हैं यदि उनके इस सीक्रेट को उनके फार्मूले को आप अपनी लाइफ में लाएंगे तो आप भी कुछ ही समय में करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने वाले व्यक्ति बन सकते हैं.मनुष्य अपने जीवन में छोटी-छोटी स्टार्ट अप से अपना एक बड़ा और विशाल बिजनेस या व्यापार खड़ा कर सकता है जिसकी बदौलत वह करोड़पति बन सकता है.

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एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया :
किसी भी बिजनेस या व्यापार को प्रारंभ करने के लिए हमें सबसे पहले एक आईडिया सोचना पड़ता है सब कुछ एक आईडिया से ही स्टार्ट होता है यदि आप का आयोजन उम्दा होगा तो वह आपको बहुत आगे ले जाएगा यदि आपके माइंड में एक आइडिया निश्चित रहेगा तो वह आपको लक्ष्य तक ले जाने में आपका सफर काफी आसान भी कर देगा हालांकि जो उद्यमी किसी बिजनेस या व्यापार को अपने आइडिया से शुरुआत करते हैं उनके जीवन में कई बड़े-बड़े बदलाव होते हैं परिवर्तन होते हैं लेकिन जीवन में आगे बढ़ने के लिए आइडिया ही सबसे महत्वपूर्ण होता है जितना बढ़िया आपका आईडिया होगा उतना ही अच्छा आपका परफॉर्मेंस होगा.

अपनी राय साझा करें :
जब कोई व्यक्ति किसी आईडिया के तहत कोई सा बिजनेस प्रारंभ करता है या फिर बिजनेस प्रारंभ करने की इच्छा जताता है तो सबसे पहले व्यक्ति को अपना आईडिया कहीं करीबी व्यक्तियों से शेयर करना चाहिए क्योंकि गरीबी व्यक्ति ही हमें शुरुआत में आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं बिजनेस में शुरुआत में इन्वेस्टमेंट करने में हमें हमारे करीबी ही सहायता करते हैं जिससे हमें अपने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने और उसमें तकनीकी प्रबंध करने में सहायता मिलती है.

कम्पनी को पंजीकृत कराये :
जब हम किसी कंपनी या व्यवसाय को प्रारंभ करते हैं तो सबसे पहला काम हमारा यहां रहता है कि हमें उस कंपनी को पंजीकृत कर रहा है ना बहुत जरूरी है क्योंकि यदि हम किसी काम को प्रारंभ करते हैं तो वह कानूनी रूप से वैध होना चाहिए यदि आप जिस काम को कर रहे हैं वह कानूनी रूप से अवैध है तो आपकी पूरी मेहनत बेकार जा सकती इसलिए सबसे पहले हमारा यह उद्देश्य होना चाहिए कि हमें अपनी कंपनी को पंजीकृत कराना बहुत ही आवश्यक है और पंजीकृत कमाल करते समय हमें इस बात का ध्यान देना आवश्यक होता है कि जो कंपनी का हम पंजीकरण करा रहे हैं वह कंपनी पार्टनरशिप में हो या फिर लिमिटेड कंपनी हो उसका भी उसमें उल्लेख किया जाना जरूरी होता है.

पंजीकृत का लाभ :
यदि हम अपनी कंपनी का पंजीकरण करवाते हैं तो हमें साझेदारों को शेयर्स बांटने में आसानी होती है पंजीकरण कंपनी को प्राइवेट लिमिटेड या फिर लिमिटेड से प्रत्यक्ष रुप से जोड़ती है.

डेवलपमेंट करना :
कंपनी प्रारंभ करने और बिजनौर बिजनेस शुरू करने के बाद पहले पड़ाव से मिली हुई रकम को हम बिजनेस डेवलपमेंट के लिए इस्तेमाल करते हैं शुरुआत के 6 से 24 महीनों तक पहले पड़ाव का पैसा हम व्यापार या बिजनेस को डेवलप पेंट करने के लिए इस्तेमाल करते हैं और इस समय हमें अपनी कंपनी की सर्विस और प्रोडक्ट को बेहतर करने के बारे में सोचना चाहिए शुरुआत में हमें मुनाफे की ओर ना ध्यान देते हुए हमें अपनी कंपनी या बिजनेस का एक बेस्ट तैयार करना होता है मुनाफे की ओर ध्यान देते हुए शुरुआत के दिनों में हमें कस्टमर की सभी जरूरतों का पूरा ध्यान रखना आवश्यक होता है ताकि कस्टमर के मन में एक उत्साह पैदा हो सके और वह हमारे प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर सकें.

धीरे-धीरे बढ़े आगे :
हमें अपने ही बिजनेस और व्यापार को डेवलपमेंट करने के साथ ही धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए ना की एकदम से हमें बहुत ऊपर की सोचना चाहिए लक्ष्य केंद्रित रखना चाहिए लेकिन उस लक्ष्य पर धीरे-धीरे वन बाई वन स्टेप बाय स्टेप पहुंचना चाहिए हमें अपने प्रोडक्ट या सर्विस को बड़े पैमाने पर लांच करने की एक बेहतरीन तैयारी करनी चाहिए और आगे लगने वाली लागत का भी ध्यान रखना चाहिए अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए और जान पहचान बढ़ाने के लिए छोटी-छोटी निवेश से हमें इसकी शुरुआत करनी चाहिए इसी सीरीज को सीरीज ए फंडिंग भी कहा जाता है,

एंजेल  इन्वेस्टर्स :
अपने व्यापार को और आगे बढ़ाने के लिए हमें एंजेल इन्वेस्टर्स से संपर्क करना चाहिए यह वह कंपनियां होती हैं जो दूसरी कंपनियों से इन्वेस्टमेंट इकट्ठा करते हुए एक स्टार्टअप प्रोजेक्ट में बड़ा इनवेस्ट करती है.कंपनी अपनी जरूरतों के अनुसार अपनी कैपिटल को और भी बढ़ाती है और इस समय अनुभव और कॉन्ट्रैक्ट का फायदा बिजनेस को होता है इन्वेस्टमेंट लाने के लिए कंपनी की कैपिटल को बढ़ावा दिया जाता है.

पोस्ट मनी वैल्यूएशन :
ग्राउंड में से फिटिंग से अलग शहर की वैल्यूएशन प्रियमणि को पोस्टमैन इवैल्यूएशन के द्वारा निर्धारित किया जाता है प्रमोटर्स भी फ्री मनी वैल्यूएशन पर ही ज्यादा ध्यान देते हैं वह सूर्य अपना ध्यान केंद्र कहते हैं और इनवेस्टर पोस्टमन इवैल्यूएशन पर अधिक जोर देते हैं इस समय यदि त्रिवेणी वैल्यूएशन कंपनी की एक करोड़ ताई होती है तो इनवेस्टर 400 लाख इनवेस्ट करने वाले होते हैं तो उन्हें 40% शेयर मिलते हैं जिनकी वैल्यू 60 लाख  हो जाती है और इन्वेस्ट करने वालों की वैल्यू 40 लाख हो जाती है इसी तरह कंपनी प्रमोटर्स की वैल्यूएशन 60 लाख तक पहुंच जाती है और इसमें उन्हें ज्यादा इन्वेस्टमेंट भी नहीं करना पड़ा. अगले पड़ाव पर पहुंचने के साथ ही कंपनी के शेयर की वैल्यू बढ़ती ही जाती है और आगे के राउंड की फीडिंग ली जा सकती है.

रुचि का बढ़ना :
जैसे-जैसे कंपनी अपने अगले पड़ाव पर पहुंचती है और कंपनी आगे बढ़ती जाती है लोगों में कंपनी के प्रति रुचि बढ़ती ही जाती है जिसका लिखता जाता उदाहरण प्रमोटर्स होते जिसकी बदौलत कंपनी में सभी की रुचि बढ़ते ही जाती है प्रमोटर्स के पास इस समय यह ऑप्शन भी रहता है कि वह अपने सारे शेयर स्कोर बेचकर कंपनी छोड़ भी सकते हैं इस तरह से शेयर बेचने को एग्जिट कहते हैं कई बड़ी-बड़ी कंपनियों में ऐसा होता है जब प्रमोटर्स अपने शहर बेचकर कंपनी छोड़ देते हैं आम तौर पर इंवेस्टर्स यही सोचते हैं कि प्रमोटर्स कंपनी छोड़कर ना जाएं और मौजूद रहे इंवेस्टर्स प्रमोटर्स को एग्जिट होने के लिए लंबा समय निर्धारित करते हैं.

शेयर बेचना :
प्रमोटर्स अपने शेयर आरपीओ के जरिए किसी भी बड़ी कंपनी को बेच सकते हैं या फिर आम लोगों को भी भेज सकते हैं IPo से शेयर बेचने की प्रक्रिया काफी लंबी होती है जिसके लिए रजिस्टर्ड स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग करना बहुत ही आवश्यक होता है जिसके बाद कंपनी के शेयर खरीदे जा सकते हैं और बेचे जा सकते हैं वहां पर एक स्टॉक एक्सचेंज उपलब्ध होता है और उनके लिए एक पब्लिक वैल्यू भी निश्चित की जाती है कि शहर की वैल्यू होगी क्या चरस की वैल्यू मांग पर निर्धारित होती है मांग की उपलब्धता उपलब्धता को देखते हुए ही शेयर्स की वैल्यू बढ़ती और घटती रहती है आम तौर पर कंपनी की आर्थिक प्रदर्शन को देखते हुए शेयर की वैल्यू निर्धारित होती है क्योंकि मिस्टर ऐसे ही कंपनी से शेयर खरीदना चाहते हैं जो उन्हें अधिक मुनाफा दे सके.

इस तरह शहर की वैल्यू अंतिम पड़ाव में बहुत अधिक बढ़ जाती है और इस तरह युवा बिना ज्यादा पैसे लगाए अपने आइडिया और प्रबंधकीय क्षमताओं को मद्देनजर रखते हुए कुछ वर्षों में करोड़ों रुपए अर्जित कर सकते हैं छोटी-छोटी रकम से ही वह करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित कर सकते हैं और करोड़पति बन सकते हैं

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