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कंपनी सैलरी देने में कर रही परेशान तो उठाएं ये कदम

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कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जो कई व्यक्तियों को अपने यहाँ काम पर तो रख लेती है लेकिन उन्हें तनख्वाह दने में कई तरह के नाटक करती है. कुछ कंपनीया तो ईएसआई होती है की वह कई कर्मचारियों की सैलरी तक रोक लेती है. इस परेशानी से जब कोई भी कर्मचारी जॉब छोड़कर जाता है तो नहे उनकी मेहनत की कमाई भी नहीं देती. इतना ही नहीं कई बार तो कर्मचारी को बिना वजह ही वह काम से निकाल देते है, और उन्हें सैलरी भी नहीं देते. इस स्थिति में कई व्यक्ति खुद को असहाय महसूस करने लग जाते है.

यदि आपके साथ या फिर आपके किसी दोस्त के साथ इस तरह की घटना हुई है तो आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है. सरकार नेकमचारियो की इस परेशानी को देखते हुए कुछ कानून बनाये है. भारत सरकार द्वारा बनाये गए कानून में कुछ अधिकार कर्मचारियों के लिए भी है. सिर्फ आपको जागरूकता होने की जरुरत है.

भेजें लीगल नोटिस

यदि आपकी कम्पनी आपको सैलरी देने से मना कर रही है या किसी तरह का कोई सैलरी देने में नाटक कर रही है तो आप कम्पनी को लीगल नोटिस भेज सकते हैं.

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समझौते का भी रहता है रास्ता

कम्पनी को लीगल नोटिस भेजने के साथ ही आपके पास समझौता करने का ऑप्शन रहता है. जब कर्मचारी को ऑफर लेटर दिया जाता है तो एक भाग लिखा होता है की किसी विवाद की स्थिति में वह समझौते का रास्ता अपना सकते है. यदि आपको उचित लगता है तो आप कोर्ट तक इस मामले को ले जा सकते है अन्यथा आप इसे समझौते के तौर पर कोर्ट से बाहर इस मसले को हल कर सकते है.

लेबर कमिशनर

यदि आपको सैलरी नहीं मिल रही है तो आप जिले के श्रम आयोग (लेबर कमीशन) के पास जा सकते है. श्रम आयोग (लेबर कमीशन) कर्मचारियों के पूर्ण अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ती है.

केस करना

कई व्यक्तियों का यदि लेबर कमिशनर के पास जाने पर भी अपनी किसी समस्या का हल नहीं निकलता है तो आप कोर्ट की शरण ले सकते है.

सिविल कोर्ट

कर्मचारी अपनी समस्या के निराकरण के लिए नागरिक प्रक्रिया संहिता 1908 के प्रावधान के अंतर्गत सिविल कोर्ट में अपना केस दर्ज कर सकते है.

कार्रवाई करने के लिए जरुरी दस्तावेज

ऑफर लेटर या रोजगार कांट्रेक्ट

यदि आप किसी कम्पनी पर केस करने जा रहे है तो आपके पास साबुत के तौर पर ऑफर लेटर या रोजगार कांट्रेक्ट का होना जरुरी है ताकि आपके पास इस बात का प्रमाण हो की आप उस कम्पनी में कार्य करते थे.

बैंक स्टेटमेंट

केस करने के लिए आपके पास सैलरी का ब्यौरा होना जरुरी होता है. ताकि आप इस बात को कोर्ट में साबित कर सके की कम्पनी ने आपको सैलरी नहीं दी है.

फ्रॉड का केस

कोई कम्पनी आपके साथ फ्रॉड करती है तो आप कम्पनी के खिलाफ कंपनीज एक्ट 2013 के सेक्शन 447 के तहत धोखाधड़ी का केस दर्ज कर सकते है.

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