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एक षड्यंत्र थी विश्वामित्र और मेनका की प्रेम कथा, जानिए भारत देश के नाम से उनका संबंध

vishwamitra and menka love story

विश्वामित्र और स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा के बारे में आपने अभी तक कई बाते सुनी होगी. लेकिन उनकी प्रेम कहानी के बारे में बहुत कम व्यक्ति जानते हैं. आज हम आपको विश्वामित्र और मेनका की प्रेम कहानी के बारे मे बताएँगे.

एक समय जब महर्षि विश्वामित्र कठोर तपस्या में लीन थे, तो उनके चेहरे पर तेज और शरीर में किसी प्रकार की कौई हलचल नहीं हो रही थी. हजारो जंगली जानवर आस-पास थे लेकिन किसी में भी महर्षि विश्वामित्र की तपस्या को भंग करने का साहस नहीं था.

महर्षि विश्वामित्र की तपस्या की जानकारी इंद्र को हुई तो उन्हे एक भय सताने लगा. ऋषि विश्वामित्र उस समय अपने कठोर तप से एक नए संसार के निर्माण करने का प्रयास कर रहे थे. इंद्र देव को चिंता साता रही थी, की विश्वामित्र अपने उद्देश्य में सफल हो गए तो, सृष्टि के देवता वह बन जाएंगे, जिससे इंद्र देव का अस्तित्व खत्म हो जायेगा. इंद्र देव ने एक योजना के तहत ऋषि विश्वामित्र की तपस्या को भंग करने का प्रयास किया.

इस काम के लिए इंद्रदेव ने स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा मेनका को चुना और उन्हे आदेश दिया की वह नारी शरीर धारण कर पृथ्वी लोक पर जाए और अपने सौंदर्य से ऋषि विश्वामित्र की तपस्या को भंग करें.

अप्सरा मेनका ऋषि विश्वामित्र को अपनी ओर आकर्षित करने का हर संभव प्रयास कर विश्वामित्र की आंखों का केंद्र बनती, तो कभी कामुकता से अपने वस्त्र हवा में उड़ने देती, ताकि ऋषि विश्वामित्र की नजर उस पर पड़ जाए. अप्सरा मेनका के निरंतर प्रयासों से ऋषि विश्वामित्र के शरीर में धीरे-धीरे बदलाव होने लगा.

मेनका के प्रतिदिन के प्रयासों से ऋषि विश्वामित्र का शरीर काम शक्ति की भावना में धीरे-धीरे जागने लगा. एक दिन ऋषि विश्वामित्र सृष्टि को बदलने का निश्चय भूल कर तपस्या से उठ खड़े हुए. सृष्टि के निर्माण के फैसले को भूल कर ऋषि विश्वामित्र स्त्री के प्यार में मगन हो गए.

विश्वामित्र अप्सरा मेनका में अपनी अर्धांगिनी को देखने लगे थे. विश्वामित्र की तपस्या तो भंग हो गई थी, लेकिन अप्सरा मेनका स्वर्ग लोक वापस नहीं गई, क्योंकि मेनका ने विचार किया की यदि वह अभी स्वर्ग लोग लौट गई तो, हो सकता है विश्वामित्र फिर से तपस्या करने बैठ जाएं.

मेनका और ऋषि विश्वामित्र दोनों वर्षों तक एक साथ रहे. ऋषि के साथ रहते हुए मेनका के दिमाग में एक चिंता थी, की उसकी अनुपस्थिति में इंद्रलोक में अप्सरा उर्वशी, रंभा इंद्रलोक में काफी आनंद उठा रही होगी. एक दिन अप्सरा मेनका ने ऋषि विश्वामित्र की एक संतान को जन्म भी दिया. उनकी संतान एक कन्या थी, जिसे जन्म देने के कुछ समय बाद मेनका ऋषि विश्वामित्र एवं संतान को छोड़कर वापस इंद्रलोक चली गई.

ऋषि विश्वामित्र ने रात के अंधेरे में कण्व ऋषि के आश्रम में अपनी पुत्री को छोड़ दिया जो आगे चलकर शकुंतला के नाम से काफी विख्यात हुई. सम्राट दुष्यंत के साथ शकुंतला का प्रेम विवाह हुआ, जिनसे उन्हें पुत्र के रुप में भारत की प्राप्ति हुई. उनके पुत्र के नाम से भारत देश का नाम विख्यात हुआ.

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