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एक कहानी-जाने कहा गया वो बचपन

कहां गया वह बचपन – कहां गया वह बचपन जब गर्मी की छुट्टियों का हमें बड़ी बेसब्री से इंतजार होता था. कहां गया वह बचपन जब एक रविवार की छुट्टी के लिए हम पूरा हफ्ता इंतजार करते थे  कहां गया वह बचपन जब तक सारे दोस्त न आ जाये हम खेल शुरू नहीं करते थे.

कहां गया वह बचपन जहां एक ही जगह पर सारे के सारे दोस्त इकट्ठा हुआ करते थे  अब तो ऐसा लगता है कि बचपन कही खो गया है,  आजकल का बचपन तो कंप्यूटर मोबाइल और वीडियो गेम में ही बसा हुआ है ना बच्चों का  कॉलोनी में दोस्त होता हैं ना मुहल्लों में कोई दोस्त होते हैं. आज कल दोस्त सिर्फ Facebook पर WhatsApp पर इंस्टाग्राम पर ही होते है क्या यही दोस्ती है.

वह दोस्त भी क्या दोस्त हुआ करते थे जब एक को चोट लगे तो दूसरा उसकी  उंगली को मुह में डाल कर उसका खून चूस जाया करता था, वह दोस्त भी क्या दोस्त हुआ करते थे जब मस्ती मस्ती में एक-दूसरे को मारने के बाद  उसकी चोट पर मिटटी लगा दिया करते थे.

वह दोस्त भी क्या दोस्त होते थे जब दोस्त से कन्च्चे जीत जाने के बाद जब वह रोता था तो उसे वापस दे दिया करते थे,वह दोस्त भी क्या दोस्त थे जब गिल्ली – डंडे में हार जाने के बाद अपना डंडा लेकर घर भाग जाया करते थे,वह दोस्त भी क्या दोस्त थे ,जिसका बल्ला होता वो हमेशा पहले बेटिंग करता था और दूसरो की बेटिंग आने पर अपना बेट लेकर घर भाग जाया करता था. वो दोस्त भी क्या दोस्त हुआ करते थे जो सितोलिया खेलने के लिए कागज और पोलीथिन की गेद बनाया करते थे और फूटे हुए मटके के टुकड़े ढूंढा करते थे.

आज हर खेल या तो कंप्यूटर पर खेला जाता है या विडियो गेम पर खेला जाता है , क्या दोस्ती जैसा कोई शब्द नहीं बचा है क्या मोहल्ले में इकट्ठे होने वाला कोई कारवां नहीं बचा है क्या बच्चों को सिर्फ घर में ही अच्छा लगता है शायद नहीं यह हमारी गलती है कि हमने हमारे बच्चों को ये नहीं सिखाया जो हमारी संस्कृति है जो हमारा कल्चर हम बच्चों को वह दे रहे हैं जो एक पश्चिमी संस्कृति है जो एक पश्चिमी कल्चर है इस कल्चर के साथ हम कहां जाएंगे आज तो बच्चे मोबाइल से खेलते हैं WhatsApp के साथ चैटिंग करते हैं Facebook पर चैटिंग करते हैं.

अपने माता पिता को भी भूल गए है क्या वह बच्चे पैदा होते हैं जो घर में किसी इन्सान के आने पर बिना पहचाने ही उनके पैर छू लिया करते थे , क्या अब वह बच्चे पैदा होते हैं जो घर पर कोई मेहमान आए तो सबसे पहले उन्हें पानी लाकर दिया करते हैं शायद नहीं आज बच्चे सिर्फ कंप्यूटर के बच्चे में है  WhatsApp,Facebook में ही  सारी दुनिया बसी रहती थी .

उसके अलावा ना घर ना परिवार ना दोस्ती सारे दोस्त तो WhatsApp पर मिल जाते हैं सारी फैमिली तो Facebook पर मिल जाती है सारे गेम तो  कंप्यूटर में मिल जाते हैं तो फिर क्यूं दोस्त बनाया जाए, क्यों परिवार में सबसे मिला जाये , आप भी अगर अपने बच्चो को यही सब कुछ सिखा रहे है तो सावधान हो जाये क्योकि शायद कल आपको आपके बच्चे भी नहीं पहचाने. 

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