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राम-सीता ने यहा किया था राजा दशरथ का पिंडदान

Ram-Sita had done here Pind Daan of Raja Dasharath

पितृ पक्ष में परिवार के सदस्यों को अपने पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करना होता है. हिंदू धर्म की मान्यता अनुसार पितृ पक्ष में पितर लोग किसी भी लोक में या किसी भी रूप में हों, धरती पर जरूर आते हैं, जिससे कि वह श्राद्ध व तर्पण से तृप्त हो सकें.

हिंदू मान्यताओं के अनुसार पिंडदान पितरों की मोक्ष प्राप्ति का एक सरल मार्ग है. गंगासागर, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, चित्रकूट, पुष्कर आदि स्थानो पर में लोग पिंड दान करते हैं, लेकिन बिहार के फल्गु तट पर बसे गया जी में पिंडदान का सबसे अधिक महत्व बताया गया है.

कहा जाता है की राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए भगवान राम और सीताजी ने भी गया जी में ही पिंडदान किया था. कहा जाता है की गया जी में परिवार का कोई एक ही सदस्य पिंड दान करता है. गरूड़ पुराण के अनुसार गया है कि गया जी जाने के लिए घर से निकलने पर चलने वाले एक-एक कदम हमारे पितरों के स्वर्गारोहण के लिए एक-एक सीढ़ी बनाने का कार्य करते हैं.

भगवान श्री विष्णु की नगरी गया जी में पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है, और वह स्वर्ग चले जाते हैं. कहा जाता है की गया जी मे स्वयं विष्णु पितृ देवता के रूप में मौजूद हैं, इसलिए इसे पितृ तीर्थ के नाम से भी जाना जाता हैं.

कहां है गया जी ?

बिहार की राजधानी पटना से करीब 100 किमी. की दूरी पर गया जी स्थित है. जहा हर साल पितृ पक्ष में 17 दिनों के लिए मेला लगता है. गया जी में पिंड दान करने के लिए देश-विदेश से लाखों लोग आते हैं. हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार फल्गु नदी के तट पर विष्णुपद मंदिर के समीप और अक्षयवट के पास पिंडदान करने से हमारे पूर्वजों को मुक्ति मिलती है.

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