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उलटे हाथो से पूजा की जाती है शिव पुत्री नागदेवी मनसा की

मनसादेवी जिन्हे नागो की देवी , विष की देवी सभी की मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी कहा जाता है मनसा देवी शिव जी की मानस पुत्री भी है , और शिव जी के गले में शोभायमान वासुकी की बहन भी है आज हम उनके बारे में बात करेंगे , दोस्तों नागपंचमी आ रही है तो ऐसे में हम नागो की देवी के बारे में केसे भूल सकते है और श्रावण का महीना भी चल रहा है तो भगवान् शिव की पुत्री के बारे ही चर्चा हो रही है , वेसे तो मनसा देवी के उद्भव के बारे में कई कहानिया प्रचलित है ! लेकिन आज हम आपको उनके जन्म से लेकर उनके देवी बनने तक की कहानी बताने जा रहे है और आखिर क्यों वो उलटे हाथो से ही अपना पूजन स्वीकार करती है इस बारे में बतायेंगे ये कथा आपने टीवी पर देखि भी होगी , आपको याद न हो तो फिल्म “नागपंचमी” इसी पर आधारित थी आइये जानते है मनसा देवी का जन्म केसे हुआ !

मनसा देवी का जन्म

माँ पार्वती ने काली का रूप लेकर कितने ही देत्यो का संहार किया है, उसी समय माता के उग्र रूप के कारण वासुकी की बहन की मौत हो गयी और वासुकी अपनी बहन की मौत के कारण काफी दुखी हुए तब भगवान् शिव ने अपने मस्तक के प्रभाव से एक कन्या को जन्म दिया और वासुकी को भेट स्वरुप उस कन्या को दे दिया चुकि ये कन्या शिव जी की मानस पुत्री थी इसलिए इसका नाम मनसा रखा गया और इस तरह मनसा देवी का जन्म हुआ !

वासुकी अपनी बहन को लेकर नागलोक के लिए निकल गये लेकिन आधे रास्ते पर ही वो गिर पड़े क्योकि उनसे मनसा का जहरीला ताप सहन नही हो सका, (देवी मनसा के जन्म से पूर्व ही शिव जी ने हलाहल विष का पान किया था , और यही हलाहल मनसा के जन्म पर उसके पुरे शरीर में भी था ! मनसा देवी में इतना विष है की अगर दुनिया के सभी सापो का विष भी इकठ्ठा कर लिया जाए तो भी मनसा देवी के विष की बराबरी नही कर सकता!) वासुकी ने भगवान् शिव को पुकारा और कहा की मै इसका ताप सहन नही कर सकता और ये कन्या शिशु अवस्था में इस ताप तो ज्यादा देर तक नही सह पाएगी इसलिए देवी मनसा को पंचकोश क्रिया द्वारा शिशु अवस्था से सीधे युवा अवस्था पहुचाया गया !

मनसा को हुआ शक्तियों पर अहंकार

जब देवी मनसा को ये मालुम हुआ की वो कितनी शक्तिशाली है तो उन्हें अपनी शक्तियों पर अहंकार हुआ और उन्होंने पाताल लोक पर अपना अधिकार जताने की कोशिश की और बल पूर्वक चाहां कीसभी उनकी पूजा करे , इसके लिए उन्होंने बगावत भी की लेकिन जब शिव जी को इस बात का पता चला की मनसा , देवी की तरह पूज्यनीय बनने के लिए सभी पर अत्याचार कर रही है तब उन्होंने मनसा देवी को बुलाया और कहा की जाओ और प्रथ्वी लोक पर ऐसा भक्त तलाशो जो तुम्हारी भक्ति करे !

इस तरह देवी का पद किया प्राप्त

देवी मनसा ने भक्त के रूप में चंद्रधर का चुनाव किया और बलपूर्वक उससे अपनी भक्ति करने के लिए कहा , चंद्रधर भगवान् शिव का भक्त था इसलिए उन्होंने मनसा की भक्ति से इनकार कर दिया ! चंद्रधर पर गुस्से मनसा ने उनसे सभी पुत्रो को मार डाला ! एक लक्ष्मीचंद्र को छोडकर , लक्ष्मीचंद्र का विवाह अखंड सोभाग्यावती कन्या बहुला के साथ किया लेकिन जब मनसा को मालुम हुआ की चंद्रधर का एक और पुत्र जीवित है तो मनसा ने लक्ष्मीचंद्र को शादी की पहली रात को ही मार डाला ! बहुला ने भगवान् शिव के सामने अपने पति को जीवित करने की विनती की , तब शिव जी ने मनसा से कहा की तुम लक्ष्मीचंद्र के प्राण वापस लोटाओ लेकिन मनसा ऐसा करने में अशक्षम रही और मनसा को अपनी गलतियों का भान हुआ उसने सभी से माफी मांगी शिव जी ने लक्ष्मीचंद्र को जीवित कर दिया और मनसा को गलतियों के लिए माफ़ भी किया !

मनसा को ये वरदान भी दिया की तुम इस संसार में देवी की तरह पूजी जाओगी और सभी की मनोकामना की पूर्ति भी करोगी जो भी तुम्हारे पास अपनी मनोकामना लेकर आयेगा वो खाली हाथ नही जाएगा ! तब चंद्रधर ने मनसा देवी को पूजा स्वरूप फुल चडाना चाहा तभी देवी मनसा ने कहा की सभी देवी देवताओं को सीधे हाथ से फुल माल अर्पण की जाती है लेकिन में सभी के उलटे हाथो से ही की गयी पूजा स्वीकार करूंगी तभी से देवी मनसा को उलटे हाथो से पूजा और भोग दिया जाता है

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