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जितेंद्र और हेमा मालिनी की होनी वाली थी शादी, लेकिन फिर कुछ यूं हुआ…

फिल्म अभिनेता जितेन्द्र का जन्म 7 अप्रैल को अमृतसर में हुआ था| इनका वास्तविक नाम रवि कपूर है| इनके पिता नकली गहनों का व्यवसाय करते थे| फिल्म की शूटिंग के लिए अक्सर नकली गहनों की जरुरत होती थी , जिसका लेन-देन जितेन्द्र करते थे| एक बार की बात है वो हमेशा की तरह महान फिल्मकार वी. शांताराम को गहने देने के लिए गये| पता नही पर कैसे , पर शांताराम को जीतेन्द्र में कलाकार बनने की योग्यता नज़र आई| वी. शांताराम ने 1959 में फिल्म ‘नवरंग’ में संध्या के अपोजिट डबल रोल का किरदार निभाने का ऑफर दिया | उसके बाद ठीक 5 साल बाद शांताराम ने ही जितेन्द्र को ‘गीत गाया पत्थर’ से लोंच किया| और फिल्म में जितेन्द्र के ओपोसिट शांताराम ने अपनी खुद की बेटी राजश्री को रखा| उसके बाद क्या था जितेन्द्र की गाड़ी धीरे-धीरे चल पड़ी और बाद में सरपट दौड़ने लगी|

जितेन्द्र, हेमा , और धर्मेद्र का एक किस्सा बहुत मशहूर है| हेमा मालिनी को जितेन्द्र बहुत पसंद करते थे| उस समय धर्मेद्र भी हेमा पर फ़िदा थे| हेमा मालिनी और जितेन्द्र चुपचाप से एक मंदिर में सादी करने वाले थे , कि ये बात धर्मेन्द्र को खी से पता हो गयी , फिर क्या था धर्मेन्द्र ने ये साड़ी बात जाकर जितेन्द्र की गर्लफ्रेंड शोभा कपूर को बता दी | शोभा कपूर ने तुरंत जाकर ये सादी रुकवा दी | बाद में शोभा ने जितेन्द्र से शादी कर ली , और धर्मेन्द्र ने हेमा से|

1967 में रविकांत नगाईच ने जितेन्द्र को लेकर एक जासूसी फिल्म बनाई जिसका नाम था “फ़र्ज़”|जितेन्द्र ने इस फिल्म में गोपाल किशन पांडे (एजेंट 116) की भूमिका निभाई| इस फिल्म के एक गीत “ मस्त बहारो का मै आशिक” में जितेन्द्र ने सफ़ेद रंग के जुटे पहने थे जो की एक सस्ती दूकान से ख़रीदे थे | और ये फिल्म जितेन्द्र की पहली बड़ी हिट फिल्म बनी| जितेन्द्र के उन्ही सफ़ेद रंग के जूतों और डांस लोगो को काफी पसंद आये| और यह उनका ट्रेडमार्क स्टाइल बन गया | इसके बाद जीतेन्द्र ने अनेक फिल्म में सफ़ेद रंग के जुटे पहने|

दक्षिण भारतीय फिल्मकारों से जितेन्द्र के बहुत ही अच्‍छे संबंध रहे। दक्षिण भारतीय निर्माता जब भी हिंदी फिल्म बनाते, जितेन्द्र उनकी पहली पसंद हुआ करते थे। उन्होंने अनेक दक्षिण भारतीय फिल्मों के हिंदी रिमेक में काम किया। उनका एक पैर बॉलीवुड में तो दूसरा दक्षिण में होता था। जितेन्द्र ने दक्षिण भारत में अपनी जमावट कुछ इस तरह की कि दूसरे बॉलीवुड हीरो को वहां पैर जमाने का मौका नहीं मिला। जितेन्द्र बेहद अनुशासन प्रिय थे और तेजी से काम करते थे। अपनी फिटनेस बनाने के लिए उन्होंने वर्षों तक रोटी और चांवल को हाथ तक नहीं लगाया|

जितेन्द्र को कभी बेहतरीन अभिनेता नही माना गया वो जनता को काफी पसंद थे इसलिए उनका फिल्मी करियर फलता-फूलता रहा | उन्होंने अधिकतर नायिका प्रधान फिल्मो में काम किया जो की पारिवारिक फिल्मे हुआ करती थी | महिलाओं के बीच में बहुत लोकप्रिय रहे|रेखा, श्रीदेवी, जया प्रदा, हेमा मालिनी, रीना रॉय के साथ उनकी जोड़ी लोगो द्वारा बहुत पसंद की गयी| गुलजार के साथ की गयी फिल्मो में जीतेन्द्र का अलग हि अंदाज़ देखने को मिलता है| गुलज़ार ने अपना लुक जितेन्द्र को दिया| कुरता – पैजामा , आखो पर चश्मा , पतली सी मुछ और अलग सा हेयर स्टाइल जितेन्द्र ने अपनाया|परिचय, किनारा , खुशबू जैसी फिल्मे उन्होंने गुलज़ार के लिए की|

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