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कोई था वॉचमैन तो कोई था मजदूर, बुलंद इरादों से बदली भारतीय क्रिकेटर्स ने अपनी किस्मत

Indian cricketer stars sucess story

जिनके इरादे मेहनत की स्याही से लिखे हुए होते हैं उनकी किस्मत के पन्ने कभी खाली नहीं होते कहते हैं ना जैसे सोने की परख सिर्फ जोहरी ही कर सकता अधिक पैसा कई व्यक्तियों को लाचार बना देता है लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो तंगी में भी हीरे की तरह चमकते हैं.

आज हम ना ही किसी बड़े बिजनेस और ना ही किसी अमीर व्यक्ति की आज हम बात करेंगे उन लोगों की जिन्होंने  अपने खून को पसीना समझकर बहाया है यदि वह अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो हर तरफ उनकी वाह वाही होती है सिर्फ उन्हीं के चर्चे होते हैं.

लेकिन जब वह अच्छा प्रदर्शन करने में असफल हो जाते हैं तो उन्हें जनता के गुस्से का सामना भी करना पड़ता है हम बात कर रहे हैं हमारे भारतीय क्रिकेटर्स की जो गरीबी से निकलकर उन्होंने अपने सपनों की एक नई उड़ान भरी है.

रविन्द्र जडेजा :

कोई भी व्यक्ति लाचार नहीं होता और कोई भी काम छोटा नहीं होता अपनी मेहनत और हौसले के बलबूते पर आज रविंद्र जडेजा जिस मुकाम पर है वह सब उनकी मेहनत और परिश्रम का ही फल है भारत की तरफ से बेहतरीन ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा एक समय चौकीदार हुआ करते थे लेकिन अपनी मेहनत के बलबूते पर आज वह इस स्थिति पर पहुंचे हैं रविंद्र के पिताजी भी एक चौकीदार ही हुआ करते थे लेकिन गरीबी के इस दलदल से निकलकर आज वह भारत के शानदार ऑलराउंडर है. 

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उमेश यादव :

गरीब परिवार में जन्मे उमेश यादव ने 12वीं तक पढ़ाई के बाद अपने परिवार को चलाने के लिए मजदूरी करना प्रारंभ कर दिया लेकिन उनके सपनों के आगे किसी के ना चल पाई लगन मेहनत से उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम मैं जगह हासिल की और आज बेहतरीन फास्ट बॉलिंग में  टीम में उनके जेसा दूसरा कोई नहीं है. 

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पठान भाई :

यूसुफ पठान और इरफान पठान यह दोनों नाम ऐसे हैं जिन्हें दुनिया का बच्चा बच्चा जानता है दोनों का ही बचपन इतना अच्छा तो नहीं देता लेकिन जब से होश संभाला तभी से वह मस्जिद की देखरेख में लग गए उन्होंने मस्जिद की गलियारों को क्रिकेट की पिच बना ली और वही प्रेक्टिस किया करते थे और एक समय ऐसा आया जब उन्हें एक खास पहचान मिल गई.

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कामरान खान :

कामरान ने वह दिन भी देखे हैं जब उनके पास रहने के लिए घर भी नहीं था जब सर ढकने के लिए छत नहीं थी तो वहां स्टेशन पर रात गुजारते थे अपनी मेहनत और लगन से 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने गरीबी को दूर किया 18 वर्ष की उम्र में ही राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 15 लाख रुपए में खरीदा. 

मनोज तिवारी :

आज जहां मनोज तिवारी के जीवन में रोशनी ही रोशनी है यह दिन के अतीत के बारे में देखा जाए तो आंखों में पानी आ जाता है रेलवे स्टेशन पर काम करते हुए उनके पास और उनके परिवार वालों के पास क्रिकेट विज्ञान के लिए दिलाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे लोन लेकर मनोज का दाखिला करवाया गया और आज वह अपने प्रदर्शन से उस कार्य का फर्ज अदा कर रहे हैं.

भुवनेश्वर कुमार :

एक समय ऐसा था जब भुवनेश्वर कुमार के पास जूते खरीदने के पैसे तक नहीं थे भुनेश्वर कुमार आज के समय में भारत के बेहतरीन बॉलर्स में से एक है उनकी गेंदबाजी को भारतीय टीम एक हम कड़ी मानती है.

मुनाफ पटेल :

मुक्कम व्यक्तियों को मना पटेरिया के अतिथि के बारे में मालूम होगा शुरुआती दिनों में वह अपना घर परिवार चलाने के लिए मजदूरी करते थे आज जिस जगह पर वह है वह अपने जस पर मेहनत और लगन की वजह से ही है.

 

 

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